कोर्ट में पीड़ित वकील ने बताया कि शादी से पहले महिला ने खुद को सिर्फ एक बार शादीशुदा और तलाकशुदा बताया था। इसी भरोसे में आकर उसने निकाह किया। लेकिन बाद में जांच में खुलासा हुआ कि महिला पहले ही चार बार निकाह कर चुकी थी और यह सच्चाई उसने जानबूझकर छुपाई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि महिला ने निकाह के समय फर्जी दस्तावेज और गलत जानकारी का इस्तेमाल किया। कोर्ट के सामने झूठे बयान देकर उसने न्यायिक प्रक्रिया को भी गुमराह करने की कोशिश की। जज ने इसे सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि कानून के साथ गंभीर अपराध करार दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिश्तों में ईमानदारी और कानून का सम्मान बेहद जरूरी है। यह फैसला समाज के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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