नई दिल्ली |
भारतीय घरों में लंबे समय तक मोटापा ही स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चिंता माना जाता रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में तस्वीर तेजी से बदली है। शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक बड़ी संख्या में युवा अब दुबलेपन, कमजोर शरीर और कम मसल्स मास की समस्या से जूझ रहे हैं। जिम की बढ़ती संस्कृति, सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स का प्रभाव और बदलती लाइफस्टाइल ने ‘मसल्स गेन’ को नई पीढ़ी की प्राथमिकता बना दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या सिर्फ “पतला होना” नहीं है, बल्कि लो मसल मास, कमजोर हड्डियां, कम स्टैमिना और खराब पोषण है, जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
राष्ट्रीय पोषण सर्वे (NNMB) और विभिन्न स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार, भारत में 18–30 आयु वर्ग के करीब 28–32% युवा अंडरवेट या कम मसल मास की श्रेणी में आते हैं। इनमें से कई लोग बाहर से पतले दिखते हैं, लेकिन अंदर से कमजोर होते हैं—जिसे चिकित्सकीय भाषा में स्किनी फैट कहा जाता है।
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