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काशी के ज्ञानवापी में श्रृंगार गौरी पूजा और 9 दिवसीय राम कथा, औरंगजेब काल से जुड़ी प्राचीन परंपरा पुनः सक्रिय


  वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में औरंगजेब काल से चली आ रही प्राचीन परंपरा को पुनः सक्रिय किया गया है। परिसर की पश्चिमी दीवार पर मां श्रृंगार गौरी का भव्य पूजन किया गया, जो ऐतिहासिक रूप से कई शताब्दियों से यहां होती आ रही है।

पूजा के साथ ही नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन भी किया गया, जिसे सीधे बाबा विश्वनाथ को सुनाया जाता है। इस कथा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक, आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा देना है। 1991 में यह परंपरा बंद हो गई थी, लेकिन योगी सरकार के कार्यकाल में इसे पिछले तीन वर्षों से भव्य रूप में पुनः शुरू किया गया है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि इस आयोजन से धार्मिक उर्जा का संचार होता है और लोग अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का अनुभव कर सकते हैं। श्रृंगार गौरी की पूजा विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

इस परंपरा का इतिहास औरंगजेब काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि उस समय भी यहाँ पूजा और कथा का आयोजन नियमित रूप से होता रहा था, जो धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है। वर्तमान में यह आयोजन वाराणसी के धार्मिक पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करता है।

श्रद्धालु, अधिकारी और स्थानीय नागरिक इस प्राचीन परंपरा को जीवित रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे काशी की धार्मिक विरासत का संरक्षण होता है

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