समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उदित राज ने कहा कि तिरुपति, पुरी और केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थल मूल रूप से बौद्ध स्थल रहे हैं, जबकि मथुरा और काशी बौद्ध धर्म के बड़े केंद्र थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतिहास की खुदाई लगातार की जाएगी, तो क्या हिंदू मंदिरों की बुनियाद पर भी सवाल खड़े नहीं होंगे।
उदित राज ने कहा, “अगर कभी बौद्धों का शासन आ गया, तो क्या वे हिंदू मंदिरों को तोड़ेंगे? क्या उनकी नींव उखाड़ दी जाएगी?” उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भारत में अलग-अलग सभ्यताएं और धर्म समय-समय पर आए हैं और हर दौर में सांस्कृतिक परिवर्तन हुए हैं। मंदिरों और मस्जिदों के नीचे बौद्ध अवशेष मिलने की बात कहते हुए उन्होंने भाजपा पर देश को विभाजित करने का आरोप लगाया।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है और इतिहास, धर्म व राजनीति के आपसी संबंधों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
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