भारत अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। ऐसी ही एक रहस्यमयी और श्रद्धा से जुड़ी कहानी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर से जुड़ी है। गोमती नदी के किनारे स्थित यह मंदिर न केवल सुल्तानपुर बल्कि आसपास के जिलों में भी अपनी दिव्यता और आस्था के कारण प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि सुल्तानपुर के संत बाबा सरवन दास अयोध्या से हनुमान जी की प्रतिमा को अपने कंधे पर उठाकर पैदल सुल्तानपुर तक लाए थे। बाद में उन्होंने कटावा गांव में अपनी कुटिया के पास इस प्रतिमा की स्थापना की, जहां आज भव्य हनुमान मंदिर स्थित है।
सुल्तानपुर मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर कटावा ग्राम सभा में स्थित इस मंदिर की प्रतिमा लगभग 150 वर्ष पुरानी बताई जाती है। मंदिर के पुजारी रामनाथ कोरी के अनुसार, हनुमान जी की यह प्रतिमा अयोध्या में सरयू नदी के तट से लाई गई थी।
आज यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं और गोमती तट पर बसे इस मंदिर की अनोखी कथा को सुनकर भाव-विभोर हो जाते हैं।
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