बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नए मेयर को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। देश के सबसे धनी नगर निगम पर हर राजनीतिक दल का कब्ज़ा होना चाहना आम बात है, और इस बार शिवसेना (उद्धव गुट) के हाथ से मुंबई की सत्ता फिसलती दिख रही है। बीएमसी में अब भाजपा और शिंदे शिवसेना की टीम ड्राइविंग सीट पर हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने नगर निकाय चुनावों में जीत के बाद पार्टी के नवनिर्वाचित पार्षदों से मुलाकात कर स्वच्छता, जल संकट और विकास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। शिंदे ने दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा नंबर एक पार्टी बनकर उभरी है, और शिवसेना थोड़े समय में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। साथ ही उन्होंने साफ कहा कि बीएमसी का अगला मेयर महायुति (भाजपा) से ही होगा।
इस बीच, उद्धव ठाकरे ने राजनीतिक खेल चलते हुए शिंदे के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। उद्धव गुट ने फैसला किया है कि यदि बीजेपी का मेयर बनता है, तो उनके जुड़े हुए पार्षद वोटिंग से दूर रहेंगे। बीएमसी में शिवसेना-यूबीटी के 65 पार्षद हैं। यदि ये पार्षद वोटिंग में शामिल नहीं होते हैं, तो भाजपा को किसी सहयोगी के सपोर्ट की जरूरत नहीं होगी और वह अकेले ही बहुमत तक पहुँच जाएगी।
उद्धव गुट की इस रणनीति से एकनाथ शिंदे के माथे पर शिकन बढ़ सकती है और बीएमसी का मेयर चुनाव राजनीतिक मोड़ लेने वाला है।
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