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RSS के हिंदू सम्मेलन में धीरेंद्र शास्त्री का तीखा संदेश—जातिवाद नहीं, राष्ट्रवाद चाहिए


 बांदा में आयोजित RSS के शताब्दी वर्ष हिंदू सम्मेलन में बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जातिवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए देश में राष्ट्रवाद को सर्वोपरि बताया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जब तक देश में जाति के नाम पर बंटवारा रहेगा, तब तक हिंदू समाज कमजोर बना रहेगा।

धीरेंद्र शास्त्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा, “न तो शर्मा बचेंगे, न वर्मा बचेंगे, न क्षत्रिय बचेंगे—अगर हम जाति में बंटे रहे तो पूरा समाज कमजोर होगा।” उनका इशारा साफ था कि हिंदुओं को जातिगत पहचान से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपरा है, जिसे जातिगत विभाजन से नुकसान पहुंच रहा है। शास्त्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्र पहले है, धर्म पहले है और इसके बाद ही बाकी पहचानें आती हैं।

सम्मेलन में मौजूद RSS के पदाधिकारियों और संत समाज ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि समाज को जोड़ने की जरूरत है, न कि तोड़ने की। कई वक्ताओं ने कहा कि इतिहास में जब भी हिंदू समाज बंटा है, तब बाहरी ताकतों ने इसका फायदा उठाया है।

कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद पर लंबी चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जातिगत राजनीति से दूर रहें और देशहित में काम करें।

हालांकि, शास्त्री के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, क्योंकि जाति का मुद्दा भारतीय राजनीति में बेहद संवेदनशील माना जाता है। बावजूद इसके, समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सच बोलने का साहस दिखाया है।

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