जनवरी 2017 में जब
एमएस धोनी ने सीमित ओवरों की भारतीय टीम की कप्तानी अचानक छोड़ने का फैसला किया, तो क्रिकेट जगत हैरान रह गया था। उस वक्त यह कदम बेहद अप्रत्याशित माना गया था, क्योंकि धोनी अब भी टीम के सबसे अनुभवी और सफल कप्तानों में गिने जाते थे।
अब पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता जतिन परांजपे ने इस फैसले को लेकर अहम खुलासा किया है। उनके मुताबिक, धोनी ने यह निर्णय पूरी तरह टीम के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया था। चयन समिति और टीम मैनेजमेंट के साथ बातचीत के दौरान धोनी ने संकेत दे दिया था कि वह नए नेतृत्व को मौका देना चाहते हैं, ताकि आगामी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए टीम समय रहते तैयार हो सके।
परांजपे के अनुसार, यह कोई दबाव में लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि धोनी की दूरदर्शिता का उदाहरण था। वह चाहते थे कि अगला कप्तान पर्याप्त समय पाए और टीम के साथ तालमेल बिठा सके। इसके बाद सीमित ओवरों की कप्तानी विराट कोहली को सौंपी गई।
धोनी का यह कदम उनके नेतृत्व शैली को दर्शाता है—जहां व्यक्तिगत पद से ज्यादा टीम का भविष्य प्राथमिकता में रहा। आज भी उस फैसले को भारतीय क्रिकेट के बड़े ट्रांजिशन मोमेंट के तौर पर देखा जाता है।
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