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बांग्लादेश में बड़ा संवैधानिक बदलाव: पीएम पद पर टाइम लिमिट समेत 5 बड़े सुधार लागू करने की तैयारी


  बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए जनमत संग्रह में 60% से अधिक मतदाताओं ने संविधान संशोधन और व्यापक सुधारों के पक्ष में मतदान किया है। इसके साथ ही मोहम्मद यूनुस के 84 सूत्री ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ को जनता की मंजूरी मिल गई है, जिससे देश में राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है।

ताजा संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बड़ी जीत दर्ज की है। अब नई संसद के सामने 180 दिनों के भीतर महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधार लागू करने की जिम्मेदारी होगी। प्रस्तावित बदलावों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, द्विसदनीय संसद की स्थापना, शासन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना शामिल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सुधारों से बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता और जवाबदेही बढ़ सकती है। हालांकि, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी आने वाले समय में अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि इतने बड़े संवैधानिक बदलावों का देश की राजनीति और शासन व्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

अब सभी की नजरें नई संसद पर टिकी हैं, जो निर्धारित समय सीमा के भीतर इन प्रस्तावित सुधारों को लागू कर देश की राजनीतिक दिशा तय करेगी।

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