उत्तर प्रदेश के Sambhal में सामाजिक सुधार की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। मुस्लिम समाज की किदवई बिरादरी की पंचायत ने शादी-ब्याह में सादगी लागू करने के लिए छह बड़े फैसले लिए हैं।
पंचायत में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में तय किया गया कि अब शादी में केवल एक बार ही दावत होगी। ‘ब्या रखने’ यानी रिश्ता पक्का करने और बार-बार की दावत जैसी रस्मों को समाप्त कर दिया गया है, ताकि फिजूलखर्ची पर रोक लगाई जा सके।
सबसे सख्त नियम बारात की टाइमिंग को लेकर बनाया गया है। तय समय से देर से पहुंचने पर बारात पर 5000 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।
इसके अलावा, शादी समारोह में डीजे और भांगड़ा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। दहेज को सजाकर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने पर भी रोक लगा दी गई है। पंचायत के नए फरमान के मुताबिक, शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन के बीच मोबाइल फोन के लेन-देन पर भी पाबंदी रहेगी।
बिरादरी के लोगों का कहना है कि इन फैसलों का मकसद दिखावे और अनावश्यक खर्च को कम करना है, ताकि शादी समारोह सादगी और सामाजिक मर्यादा के साथ संपन्न हो सके।
अब देखना होगा कि यह पहल अन्य समाजों के लिए भी मिसाल बनती है या नहीं।

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