भारत और चीन की आर्थिक यात्रा की तुलना आज फिर चर्चा में है। एक समय ऐसा था जब 1980 के दशक में भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन से अधिक मानी जाती थी। लेकिन बीते चार दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत से कई गुना आगे निकल गया है।
China ने 1980 के दशक में बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार, निर्यात-आधारित मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की स्थापना और तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने उसे वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बना दिया। वहीं India ने 1991 के बाद उदारीकरण की राह पकड़ी और आईटी व सेवा क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षमता उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ सकी।
चीन की आर्थिक नीतियों में दीर्घकालिक योजना, बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन और आक्रामक निर्यात रणनीति प्रमुख रही। इसके मुकाबले भारत को नीति क्रियान्वयन, इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रम सुधार और विनिर्माण क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि भारत ने भी पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय प्रगति की है और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में अब भी चीन से काफी पीछे है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, स्किल डेवलपमेंट और निर्यात विस्तार पर फोकस करके भारत इस अंतर को कम कर सकता है।

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