नई दिल्ली: राजधानी में इन दिनों बच्चों के गायब होने की अफवाहों ने खौफ का माहौल बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, व्हाट्सएप ग्रुप्स और मोहल्लों में ‘सावधान’ और ‘अलर्ट’ संदेशों की भरमार है। लोगों के बीच चर्चा है कि दिल्ली अब ‘लापतागंज’ बन गई है।
हालांकि दिल्ली पुलिस लगातार कह रही है कि ऐसी कोई घटना असामान्य नहीं है और आंकड़े सामान्य हैं। पुलिस ने साफ किया कि जनवरी के पहले 15 दिनों में दिल्ली से 800 से अधिक लोग गायब होने की खबरें भी सच नहीं हैं, और इनमें अधिकांश दावे अफवाह पर आधारित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अफवाहें लोगों में डर फैलाने और समाज में अशांति पैदा करने का काम करती हैं। सोशल मीडिया पर फैल रही रिपोर्ट्स ने हालात को और बिगाड़ दिया, जिससे दिल्ली पुलिस को मैदान में उतरकर जनता को भरोसा दिलाना पड़ा।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों की राय है कि यह केवल अफवाह नहीं, बल्कि कहीं बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है। घर-घर में शोर और डर फैलाने का मकसद साफ नजर आता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध सूचना को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले प्रमाणित कर लें।
दिल्लीवासियों के लिए जरूरी है कि वे शांत रहें और अफवाहों के जाल में न फंसे, ताकि शहर में भय और अशांति का माहौल ना बने।

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