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काशी विश्वनाथ: मोक्ष नगरी का ज्योतिर्लिंग, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम


  उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। इसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि काशी में मृत्यु होने पर स्वयं महादेव तारक मंत्र देकर जीव को मुक्ति प्रदान करते हैं। इसी विश्वास ने सदियों से भक्तों, संतों और राजाओं को यहां खींचा है।

इतिहास के पन्नों में यह मंदिर कई बार ध्वस्त और पुनर्निर्मित हुआ। वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। बाद में सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को स्वर्ण से मढ़वाने के लिए सोना दान दिया, जो आज इसकी पहचान बन चुका है।

मंदिर का गंगा से विशेष आध्यात्मिक संबंध है। श्रद्धालु पहले गंगा स्नान कर फिर बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं। कहा जाता है कि काशी स्वयं शिव के त्रिशूल पर स्थित है, इसलिए यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा अद्वितीय मानी जाती है।

हाल के वर्षों में विकसित काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर ने मंदिर परिसर को भव्य और सुगम बनाया है। आस्था, इतिहास और रहस्यों से भरा यह धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है।

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