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सहमति से बने संबंध रेप नहीं’—हाई कोर्ट ने PCS अधिकारी के खिलाफ केस खारिज किया


  Allahabad High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पीसीएस अधिकारी के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप में दायर चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि यदि वयस्कों के बीच संबंध आपसी सहमति से बनाए गए हों, तो उन्हें बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

मामले में याचिकाकर्ता अधिकारी ने दलील दी थी कि शिकायतकर्ता के साथ उनके संबंध सहमति पर आधारित थे और दोनों के बीच लंबे समय से जान-पहचान थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि किसी प्रकार का दबाव, धोखा या जबरदस्ती नहीं की गई थी।

कोर्ट ने रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया जबरन संबंध बनाने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि सहमति से बने शारीरिक संबंध, यदि स्पष्ट रूप से दबाव या धोखाधड़ी से मुक्त हों, तो उन्हें दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

इसके साथ ही अदालत ने संबंधित ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही और दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले के तथ्य अलग होते हैं और निर्णय परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है।

यह फैसला सहमति और दुष्कर्म की कानूनी परिभाषा पर एक बार फिर बहस को केंद्र में ले आया है।

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