फरवरी का महीना चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस दौरान फली बेधक और सेमिलूपर जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं, जो पत्तियों और फलियों को काटकर पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर कीट नियंत्रण अपनाने की सलाह दी है.
कृषि विज्ञान केंद्र, नियामतपुर के डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि इन कीटों से निपटने के लिए इज़ादिरैक्टिन (Azadirachtin 0.03%) या नीम तेल का छिड़काव प्रभावी है. एक हेक्टेयर खेत के लिए 5 लीटर दवा को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें. यदि फली बेधक का प्रकोप अधिक हो, तो फेनवेलरेट (Fenvalerate) डस्ट 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करना चाहिए.
दवा के असर को बढ़ाने के लिए स्प्रे में स्टीकर (Sticker) मिलाना जरूरी है, ताकि दवा पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक जाए और कीटों का प्रभावी खात्मा हो. किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की निगरानी नियमित रखें और समय पर छिड़काव कर अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित बनाएं, ताकि आने वाले मौसम में अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सके.
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