नई दिल्ली:
वैश्विक तेल बाजार में समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों को लेकर सतर्कता बरतते हुए भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात में आंशिक कटौती की, तो चीन ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। चीन ने रूस से तेल खरीद को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाकर न सिर्फ अपनी ऊर्जा जरूरतें मजबूत कीं, बल्कि रूस के लिए भी बड़ी आर्थिक राहत का रास्ता खोल दिया।
मार्केट डेटा एजेंसी LSEG के अनुसार, जनवरी 2026 में चीन समुद्री मार्ग से रूस से प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करने की तैयारी में है। यह आंकड़ा दिसंबर 2025 के करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा है। खास बात यह है कि रूसी यूराल क्रूड (Urals Crude), जो बीते महीनों तक भारतीय रिफाइनरियों की पहली पसंद था, अब तेजी से चीन का रुख कर रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में चीन ने यूराल क्रूड की खरीद बढ़ाकर 4.05 लाख बैरल प्रतिदिन कर दी है, जो पिछले डेढ़ साल का सबसे ऊंचा स्तर है। रूस ने यह तेल चीन को भारी छूट पर उपलब्ध कराया, जिससे चीन को सस्ता ऊर्जा संसाधन मिला और रूस को प्रतिबंधों के बीच स्थिर आय।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा आयात घटाने का फैसला भू-राजनीतिक दबाव और भुगतान जोखिमों से जुड़ा है, जबकि चीन ने पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए आक्रामक खरीद रणनीति अपनाई है। इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति में अवसर मिलने पर चीन तेजी से कदम उठाता है, जबकि भारत अधिक संतुलित और सतर्क रुख अपना रहा है।

Comments
Post a Comment