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भक्ति और एआई का संगम: कन्हैया मित्तल ला रहे हैं खाटू श्याम पर भारत की पहली एआई-ड्रिवन फिल्म


 जब भक्ति और तकनीक एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो आस्था को एक नया स्वरूप मिलता है। इसी दिशा में एक अनोखा प्रयोग लेकर आए हैं मशहूर भजन गायक और कलाकार कन्हैया मित्तल, जो भगवान खाटू श्याम पर आधारित भारत की पहली एआई-ड्रिवन फिल्म बनाने जा रहे हैं। यह फिल्म न सिर्फ धार्मिक कथाओं को आधुनिक शैली में प्रस्तुत करेगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सकारात्मक उपयोग का भी मजबूत संदेश देगी।

एक विशेष बातचीत में कन्हैया मित्तल ने भक्ति, तकनीक, संघर्ष और अपने आध्यात्मिक सफर पर खुलकर चर्चा की।

एआई फिल्म का विचार कैसे आया?

कन्हैया मित्तल ने बताया कि इस फिल्म का उद्देश्य लोगों को खाटू श्याम से जुड़े मूल तथ्यों से परिचित कराना है—जैसे उनका पूर्व जन्म, उनका दिव्य इतिहास और उन्हें “हारे का सहारा” क्यों कहा जाता है।

उन्होंने कहा,

“हम किसी अभिनेता को भगवान के रूप में दिखाकर उसे पूजनीय बना देना सही नहीं मानते। इसलिए हमने एआई का रास्ता चुना। यह जोखिम भरा था, लेकिन हमने ठान लिया था कि या तो कुछ नया करेंगे, या अनुभव लेकर लौटेंगे।”

मायथोलॉजी में कलाकारों की कास्टिंग पर राय

बॉलीवुड में पौराणिक किरदारों में बड़े कलाकारों को कास्ट करने पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह क्रिएटिव स्वतंत्रता का मामला है।

“जैसे कोई भगवान को लड्डू चढ़ाता है तो कोई कचौड़ी—सबकी श्रद्धा अलग है। इसलिए इस पर टिप्पणी उचित नहीं।”

भक्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तालमेल

कन्हैया मित्तल का मानना है कि भक्ति जहां भी प्रवेश करती है, वह पवित्रता में बदल जाती है—चाहे भोजन हो या मनुष्य। इसी तरह जब एआई में भक्ति का समावेश होगा, तो लोग इसे प्रेम और श्रद्धा से स्वीकार करेंगे।

फिल्म का बड़ा उद्देश्य

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फिल्म सिर्फ खाटू श्याम की कथा तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य एआई के सही इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

“आज लोग एआई से डीपफेक बनाकर दूसरों को बदनाम कर रहे हैं। हम दिखाना चाहते हैं कि यही तकनीक सकारात्मक और रचनात्मक कामों में भी इस्तेमाल हो सकती है।”

एआई से फिल्म बनाना कितना कठिन था?

कन्हैया मित्तल ने माना कि यह सफर आसान नहीं था—डायलॉग सिंक, कैरेक्टर मूवमेंट और विजुअल्स में कई चुनौतियां आईं।

लेकिन उन्होंने कहा कि बाबा खाटू श्याम की कृपा से सब काम होते चले गए।

“जहां मैं एक गाने की उम्मीद कर रहा था, वहां पूरी फिल्म मिल गई। 90% लोगों ने कहा कि यह बिल्कुल रियल शूट लगती है।”

भविष्य की योजनाएं

उन्होंने बताया कि वे आगे भी एआई के साथ कई धार्मिक और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। खास बात यह है कि वे भारत की 36 बिरादरियों—जाट, यादव, चमार, वाल्मीकि आदि—को सम्मान देते हुए उनके इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं।

खाटू श्याम ने जिंदगी कैसे बदली?

कन्हैया मित्तल ने भावुक होकर कहा:

“इरादे लाख बनते हैं, बनकर टूट जाते हैं, वहीं खाटू जाते हैं जिन्हें बाबा बुलाते हैं।”

उन्होंने बताया कि वे 7 साल की उम्र से भजन गा रहे हैं और 28 साल इस सफर में बीत चुके हैं। 2016 में उन्होंने संगीत छोड़कर पारिवारिक बिजनेस पकड़ा था, लेकिन मन नहीं लगा।

2017 में उन्हें पहली बार भजन कार्यक्रम के लिए 1 लाख रुपये का चेक मिला। उसी साल उन्होंने 200 से ज्यादा कार्यक्रम किए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वे कहते हैं,

“मेरे लिए चमत्कार पैसा कमाना नहीं है, बल्कि अपनी शर्तों पर काम कर पाना है।”

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