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“पेरेंटिंग: कम मार्क्स आए तो क्या कमजोर है बच्चे का IQ? जानें कब ज़रूरी है IQ टेस्ट”

 


“क्या आपके बच्चे के स्कूल मार्क्स कम आ रहे हैं? चिंता होना स्वाभाविक है, लेकिन याद रखें – 12 साल की उम्र में एवरेज मार्क्स कोई असामान्य बात नहीं है। मैथ और साइंस जैसे विषयों में चुनौती आना आम है। सही मार्गदर्शन, धैर्य और सपोर्ट मिलने पर बच्चे बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

कम मार्क्स के कई कारण हो सकते हैं – पढ़ाई में मन न लगना, स्कूल या टीचर का प्रेशर, एग्जाम एंग्जाइटी, सही गाइडेंस का अभाव, नींद की कमी या हेल्थ फैक्टर। इसलिए सिर्फ मार्क्स देखकर बच्चे पर दबाव डालना सही नहीं है।

हर बच्चे की अपनी रुचियां और क्षमताएं होती हैं। कोई खेल, म्यूजिक, आर्ट या क्रिएटिव फील्ड में बेहतर होता है। पेरेंटिंग का मतलब है बच्चे को समझना, उसकी ताकत और रुचियों को पहचानना, और भावनात्मक रूप से सपोर्ट करना।

अब बात IQ टेस्ट की। IQ यानी इंटेलिजेंस कोशेंट टेस्ट बच्चों की सोचने-समझने, तर्क करने और समस्या सुलझाने की क्षमता को मापता है। यह मुख्य रूप से लॉजिकल थिंकिंग, मैथ, मेमोरी और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को परखता है।

लेकिन ध्यान रखें, IQ टेस्ट बच्चे की पूरी इंटेलिजेंस का पैमाना नहीं है। यह क्रिएटिविटी, सोशल स्किल्स या टैलेंट को नहीं मापता। बच्चे का मूड, वातावरण और एक्सपोजर भी इसका असर डालते हैं।

इसलिए बच्चे को बिना दबाव दिए समझें, उसकी रुचियों और क्षमताओं को पहचानें। सही गाइडेंस और सपोर्ट से हर बच्चा अपनी गति से सीख सकता है और तरक्की कर सकता है।

याद रखें, प्यार और समझदारी से की गई पेरेंटिंग ही बच्चे की असली ताकत बनती है।

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