ऋषिकेश में महाशिवरात्रि की तैयारियों के बीच शिव भक्तों के बीच पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस पर्व को भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब श्रद्धालु व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजन के जरिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि जहां कुछ फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं, वहीं केतकी का फूल अर्पित करना वर्जित माना जाता है।
महंत रामेश्वर गिरी ने बताया कि इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तभी भगवान शिव एक अनंत अग्नि स्तंभ यानी दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुए और दोनों देवताओं से उसके आदि और अंत का पता लगाने को कहा।
मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने केतकी फूल को झूठी गवाही देने के लिए प्रेरित किया, जिससे भगवान शिव नाराज़ हो गए और केतकी को अपनी पूजा में वर्जित घोषित कर दिया। तभी से शिव पूजा में इस फूल का प्रयोग नहीं किया जाता।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि महाशिवरात्रि पर पूजा करते समय सही विधि और मान्यताओं का पालन करना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
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