उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी हलचल तेज हो गई है और चुनावी रणभूमि के तौर पर गौतमबुद्ध नगर उभर कर सामने आया है। कभी ‘अशुभ’ माने जाने वाले इस इलाके में अब बड़ी रैलियों और शक्ति प्रदर्शन की तैयारी जोरों पर है, जिससे आने वाले चुनाव की दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सत्तारूढ़ दल विकास के एजेंडे के साथ मैदान में उतर चुका है। 21 फरवरी को औद्योगिक परियोजनाओं और सेमीकंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव शामिल होंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन की भी तैयारी है। इसके साथ ही जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को लेकर भी बड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं, जिन्हें पश्चिमी यूपी की राजनीति में गेम-चेंजर माना जा रहा है।
वहीं विपक्ष भी पीछे नहीं है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को ‘PDA भाईचारा रैली’ के जरिए शक्ति प्रदर्शन करेंगे और क्षेत्र में राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर बसपा भी मार्च में बड़ी रैली आयोजित कर अपने संगठनात्मक दमखम का प्रदर्शन करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक रूप से अहम इस क्षेत्र से शुरू हुआ चुनावी अभियान प्रदेश की सत्ता की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले महीनों में यहां होने वाली रैलियां और विकास परियोजनाएं मिशन-2027 की रणनीति का केंद्र बनती नजर आ रही हैं।

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