दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में तेजी से बदलते मौसम का असर बच्चों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बच्चों की ओपीडी में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर नवजात और छोटे बच्चे खांसी-जुकाम और वायरल संक्रमण से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
चाइल्ड और न्यूबॉर्न स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह के मुताबिक, खांसी-जुकाम की शुरुआती अवस्था में तुरंत दवा देना हमेशा जरूरी नहीं होता। उनका कहना है कि कई मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद ही संक्रमण से लड़ने में सक्षम होती है, इसलिए हल्के लक्षणों में 3 से 4 दिन तक निगरानी रखना बेहतर माना जाता है। हालांकि, यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं और छोटे बच्चे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में माता-पिता को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा देने से बचना चाहिए और बच्चों को पर्याप्त आराम, हल्का पौष्टिक आहार तथा स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि लक्षणों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि बच्चों की सेहत सुरक्षित रखी जा सके।

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