राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा में विज्ञान विषय का परिणाम चौंकाने वाला रहा है। भारी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने के बावजूद आयोग को निर्धारित पदों के मुकाबले पर्याप्त योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाए। 350 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में केवल 296 अभ्यर्थी ही सफल हो सके हैं, जिससे कई पद खाली रह गए हैं।
RPSC ने आठ विषयों के कुल 2129 पदों पर भर्ती निकाली थी, जिनमें विज्ञान विषय के लिए 350 पद निर्धारित थे। विज्ञान विषय के लिए 1,68,206 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
9 सितंबर 2025 को हुई परीक्षा में 1,17,364 उम्मीदवार शामिल हुए, लेकिन अंतिम परिणाम में चयन संख्या 300 से भी कम रही।
इस भर्ती में आयोग द्वारा लागू ‘पांचवें विकल्प’ का नियम बड़ा कारण बनकर सामने आया। जिन अभ्यर्थियों ने 10% से अधिक प्रश्नों में कोई विकल्प नहीं भरा, उन्हें सीधे अयोग्य घोषित कर दिया गया।
इसी नियम के चलते 359 अभ्यर्थी तकनीकी कारणों से चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। नियम के अनुसार, यदि उम्मीदवार को उत्तर नहीं आता था तो उसे अनिवार्य रूप से पांचवां विकल्प भरना जरूरी था।
न्यूनतम अंक हासिल न होने के कारण एसटी, एससी महिला और दिव्यांग वर्ग के कई पद खाली रह गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों की कमी ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े नियम, तकनीकी त्रुटियां और न्यूनतम अंक की शर्तें इस स्थिति के पीछे प्रमुख कारण हो सकती हैं। यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
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